
मुंब्रा का गौरव: जब शरीफा खाला ने जीता उमराह का सफर और अपने शौहर को पहनाया जीत का मेडल
मुंब्रा: बीती शाम मुंब्रा की सरजमीं एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। मौका था मर्ज़िया पठान द्वारा आयोजित ‘सीरत-उन-नबी’ प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह का। जहाँ ज्ञान और आस्था के संगम के बीच शरीफा अब्दुल रशीद मेमन को पहले पुरस्कार (फर्स्ट प्राइज) के रूप में ‘उमराह पैकेज’ से नवाजा गया।
एक स्टैंडिंग ओवेशन जिसने दिल जीत लिया जैसे ही मंच से शरीफा खाला के नाम का ऐलान हुआ, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लोग अपनी सीटों से खड़े हो गए (Standing Ovation)। यह मंजर इस बात का गवाह था कि मुंब्रा की जनता दूसरों की खुशी में शरीक होना बखूबी जानती है। आयोजक मर्ज़िया पठान ने भी भावुक होते हुए कहा, “सब लोग इतने खुश हैं कि हम में से कोई एक अल्लाह के घर जा रहा है, यही हमारी असल कामयाबी है।”
सालों पुरानी रीत बदली: बीवी ले जाएगी शौहर को उमराह पर इस कार्यक्रम की सबसे खास बात वह रही जिसे मर्ज़िया पठान ने ‘एक नई प्रथा की शुरुआत’ बताया। आमतौर पर देखा जाता है कि शौहर अपनी बीवी को उमराह या हज पर ले जाते हैं, लेकिन शरीफा खाला ने अपनी मेहनत और इल्म के दम पर यह इनाम जीता और अपने मेहरम के तौर पर अपने शौहर अब्दुल रशीद जी को चुना।
मंच पर एक बेहद भावुक पल तब आया जब शरीफा खाला ने अपने हाथों से अपने शौहर को जीत का मेडल पहनाया। खुशी के मारे दोनों की आंखों में नमी और चेहरे पर मुस्कान थी।
पूरी दुनिया के लिए मांगी दुआ मर्ज़िया पठान ने विजेता दंपत्ति से अपील की कि जब वे मुकद्दस मक्का और मदीना की धरती पर कदम रखें, तो वहां से:
- पूरी इंसानियत की भलाई के लिए दुआ करें।
- मुंब्रा की तरक्की और अमन के लिए हाथ उठाएं।
- दुनिया में चल रहे हालातों और मजलूमों की हिफाजत की दुआ करें।
साझा खुशी का पैगाम कार्यक्रम के अंत में ड्रोन कैमरों के जरिए मुंब्रा की उस विशाल भीड़ और उनकी खुशी को कैद किया गया। शरीफा खाला के पास पासपोर्ट पहले से ही तैयार है, जो इस बात का संकेत है कि अल्लाह ने उन्हें पहले ही चुन लिया था।
यह प्रोग्राम सिर्फ एक कंपटीशन नहीं था, बल्कि मुंब्रा के लोगों के बीच मोहब्बत, इल्म और मजहबी बेदारी का एक जरिया साबित हुआ। बाकी विजेताओं को भी मेडल, सर्टिफिकेट और नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

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